मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

करवा चौथ

अगर दशरथ कैकई को न देते एक वचन
न राम को वनवास होता, न सीता का अपरहण
न मिलते हनुमान, न रास्ता भटकता रावण
न मनता दशेहरा, न दीवाली का पर्व पावन

मगर ये तो विधी का विधान था
एक अमावस का उजालों से उद्धार था
वाल्मिकी ने क्या खूब महाकाव्य रचा था
हर होनी को बड़ी बारीकी से गढा था

पर सीता से उनका बैर समझ नहीं आया
अग्नि परीक्षा के बाद भी उसे आज़माया
धोबी के कहने पर घर से निकलवाया
युवराजों का जन्म भी आश्रम में करवाया

वाल्मीकि के इस महाकाव्य में अजीब सा पक्षपात है
सीता ही क्यूँ हर अध्याय में अकेली और लाचार है
उसकी भक्ति का फल क्यूँ त्याग और बलिदान है
क्या यही मर्यादा पुरुषोत्तम का आधार है

वाल्मीकि इस महाकाव्य से अमर हो गए
सीता धरती में, राम जल में विलीन हो गए
बरसों बरस हम यही कहानी दोहराते रहे
अग्नि परीक्षा को नारी का गहना बताते रहे

रामायण को अब सीता की नज़र से लिखना होगा
वाल्मीकि के इस पक्षपात को हमें सुधारना होगा
स्वयम्वर तो फ़िर एक बार सीता का राम से ही होगा
करवा चौथ का व्रत बस अब से राम को रखना होगा

3 टिप्‍पणियां:

  1. from next year it is our turn rajeev, no harm in it, for a change. good one.

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  2. Mishra G,Pls dish out some digestible stuff for lesser mortals such as your's truly.

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  3. zamana badal gaya hai, tab ek ravan tha, aaj ke is yug mein anek ravan hai, par maryada purshottam ram aur sita toh valmiki ki kalpana mein hi hai.
    karva chauth kya, har vrat ab se rajeev aur uske saathiyon ko rakhna hoga.

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