सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

यह शिक्षा

यह शिक्षा कैम्पियन की तो नहीं हो सकती
डार्लिंग, यह शिक्षा फादर जो की नहीं हो सकती

आगे बढ़ कर, मदद कर के, दोस्ती का मान रखो
पीठ पीछे फायदा उठा कर, छल कपट का खेल खेलो

हर शक को बेबुनियाद बता कर, सच का ढोंग रच कर
सीना तान कर दोस्त के विश्वास से गन्दा खेल खेलो

और अचानक एक रोज़ रंगे हाथों पकडे जाने पर
घर से निकाल कर अपनी ताकत का पूरा खेल खलो

यह शिक्षा कैम्पियन की तो नहीं हो सकती
डार्लिंग, यह शिक्षा फादर जो की नहीं हो सकती

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

मेहमान

मुमकिन नहीं फ़िर क्यूँ हमें ये गुमान हो गया
चुपके इस आज कोई फ़िर दिल का मेहमान हो गया

ये जान तो एक मुद्दत से किसी और की अमानत है
बेखुदी में फ़िर हमसे ये कैसा गुनाह हो गया

अपनी आशिकी का हमसफर हमें हमेशा से अज़ीज़ है
फ़िर क्यूँ लगा जैसे एक हमराह और मिल गया

चंद लम्हों की राह थी कोई ख्वाबों की सहर तो नहीं
लगता है मगर उम्र भर का जैसे कोई रिश्ता हो गया

एक अरसा हुआ था हमें अपने साये से मिले
इस मोड़ पर अचानक फ़िर वो तन्हा मिल गया

खुशियाँ गर न मिलीं तो गम बहुत चले आयेंगे
सर रखने को शायद एक कंधा और मिल गया

मोहब्बत जागीर नहीं किसी की, इंसानी जज्बा है ये
भरी महफिल में क्यूँ हमारा नाम नीलाम हो गया

ज़माना तो ज़माने से दीवाना है इसका क्या ईमान
शिकायत के इसे बस एक बहाना और मिल गया

बहुत छोटी है ज़िन्दगी न जाने कब खुदा बुला ले
हमें याद करने को चलो एक आंसू और मिल गया

अजीब इत्तेफाक है कितनी मिलती है दास्ताँ हमारी
कुछ कहा नहीं किसी ने और कैसा ये इज़हार हो गया

कोई अफ़सोस नहीं उन्हें ये खयाल भी न आयें "राजीव"
खूबसूरत एक ग़ज़ल का हमें आज ख़याल मिल गया

शनिवार, 12 नवंबर 2011

ये दोस्ती

क्या कहूं दोस्ती के मायने क्या हो गए हैं
फेस बुक पर हैं और ज़िन्दगी से लापता हो गए हैं

ज़माने के बदलते तौर तरीकों के मद्दे नज़र
कुछ अजनबी और कुछ सौदागर हो गए हैं

अच्छे होते हैं बेकारी और मुफलिसी के दिन
बड़े बड़े फ़कीर दोस्ती के बारे में कह गए हैं

ज़रा सी मुलाक़ात तोल मोल में बदल जाती है
किससे कितने फायदे और नुक्सान हो गए हैं

सीधी सीधी बातें ओढती हैं सियासती लिबास
अलफ़ाज़ तो अलफ़ाज़, इरादे भी बदल गए हैं

दोस्त और दोस्ती के जाने पहचाने रास्ते थे
बीवी बच्चों के साथ अब नए दोस्त जुड़ गए हैं

गुज़रे सालों का हिसाब अब यादों से नहीं होता
हैसियत और काबलियत नए मापदंड हो गए हैं

दोस्तों की कामयाबी के जश्न को वक़्त कहाँ
खुद की तारीफ़ में इतने मसरूफ हो गए हैं

भागती दौड़ती ज़िन्दगी में मिलते हैं कभी
शुक्र है खुदा का इतने तो करीब रह गए हैं

न खुशियों का रिश्ता है अब कोई, न ग़म का
पैमानों पर बस कीमत के लेबल लग गए हैं

स्कूल कॉलेज की महफिलों में ज़रा सांस लेते ही
कार और कारोबार के हिसाब लगने लग गए हैं

क्या लाये हो और क्या ले जाओगे यहाँ से
गीता के ज्ञान के मायने क्या से क्या हो गए हैं

ईर्ष्या द्वेष छल कपट फायदा नुक्सान पढ़ा नहीं था
दुनियादारी की शिक्षा में कितने विद्वान हो गए हैं

दौलत का नशा सबसे गाडा और नशीला है "राजीव"
दोस्ती की कहानी के किरदार इस रंग में डूब गए हैं

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

शराब

बुरा हो शराब का मेरी ज़िन्दगी यूँ बदल दी
ऐसी छूटी मूंह से, मेरे यार ने नज़र बदल दी

उसकी आगोश में कितना अज़ीज़ लगता था
वजह बेवजह खूब गुफ्तगू किया करता था
रात की ख़ामोशी को ठहाकों से चीरता था
घन्टे दो घन्टे के लिए सच बोला करता था
मेरा दोस्त इसी बहाने फ़ोन कर लिया करता था

जबसे शराब को तलाक़ दे आया है
जाने क्या मर्ज़ लगाया है
साला अजीब होश में आया है
पता नहीं किस बात से घबराया है
मुद्दतें हुईं उसने फ़ोन नहीं लगाया है

फिर एक रोज़ कमबख्त मुझसे छूट गयी
मानों जैसे एक और क़यामत हो गयी
अचानक सारी तमीज़ तहज़ीब लुट गयी
दुनियादारी की जैसे हर रस्म छूट गयी
तन्हाई दौड़ कर मुझसे लिपट गयी

कल तक जो साथ था वो दूर हो गया
दोस्तों से भरा काफिला यूँ गुम हो गया
महफिलों का भी जनाज़ा निकल गया
कहने सुनने को कोई बाकि नहीं रह गया
बगैर शराब ज़िन्दगी का मोल नहीं रह गया

बुरा हो शराब का मेरी ज़िन्दगी यूँ बदल दी
ऐसी छूटी मूंह से, मेरी कायनात ही बदल दी