बुधवार, 20 जुलाई 2011

जुनून

ज़िन्दगी जीने के लिए एक जुनून होना चाहिए
आसमान से तारे तोड़ने का फितूर होने चाहिए

छोटी छोटी ख्वाहिशों के साथ बहुत ज़रूरी है
आँखों में बसा कोई बड़ा ख्वाब होना चाहिए

मेहनत के फल मीठे होंगे, बस इतना ख्याल रहे
उसमें पसीने की महक और खून का रंग होने चाहिए

हार जीत का फ़ैसला तो बहुत बाद में होता है
पहले खेल को सीखने की कोशिश होना चाहिए

आंधियों की ज़िद में कभी घोसला टूट भी जाए अगर
नए पेड़ पर फ़िर तिनके जोड़ने का हौसला होना चाहिए

नामुमकिन में ही मुमकिन छुपा है हमेशा से
सिर्फ़ इरादा पक्का और जोश बुलंद होना चाहिए

कौन क्या कहता है इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता
बस अपना ईमान और अपनी नीयत साफ़ होना चाहिए

मंजिल की तलाश में मिल रहे सायों का साथ याद रहे
बरसों बाद भी क़दमों के निशाँ उनसे जुड़े होना चाहिए

कहीं और तेरा नाम आए की न आए "राजीव"
दीवानों की महफिल में तेरा ज़िक्र ज़रूर होना चाहिए

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

रोहन

तुझसे ही जुडे हैं ख्वाब मेरे
जुडी हैं तुझसे खुशियाँ मेरी
आसमान पर लिख़ा हो नाम तेरा
है आरज़ू यही, यही है ख्वाहिश मेरी

गुज़रने को है बस बचपन तेरा
जवानी दे रही देहलीज़ पर दस्तक
तुझे देख कर इस ख़याल भर से ही
खून में दौड़ जाती है जवानी मेरी

मुझसे लंबा हो कर ख़ुश होता है
बेवजह बात बात पर जूझता है
मुझसे कहीं ऊंचा तेरा कद होगा
फक्र से गर्दन ऊंची हो जाएगी मेरी

मिलेंगे बहुत से दोस्त और यार तुझे
कुछ समझायेंगे कुछ भटकायेंगे तुझे
हसीं खेल में अपनी मंजिल मत भूलना
गाँठ बाँध कर रखना हमेशा ये बात मेरी

हर बार कोई साथ नहीं होता
हर रास्ता आसान नहीं होता
अपना सफ़र ख़ुद तय करना पड़ता है
पुकार लेना जब कभी याद आ जाये मेरी

ज़िन्दगी का कोई शोर्ट कट नहीं होता
बिना मेहनत कोई कामयाब नहीं होता
मरे बगैर स्वर्ग नहीं मिलता
सच कहा करतीं थीं नानी मेरी

खुदगर्ज़ी हमेशा रास्ता भटकाएगी
ख़ुद्दारी अपनी जगह ख़ुद बनाएगी
मासूमियत और ईमान बचाए रखना
हर राह पर साथ चलेंगी दुआएं मेरी

गरीबों, बेसहारों की मदद करना
दुश्मनों पर भी रहम करना
रखना वक़्त ख़ुद और ख़ुदा के लिए
यूँ समझ ये ख़ास नसीहत है मेरी

सरपट दौड़ता वक़्त भागता जायेगा
कल तू अपने पैरों पर खड़ा हो जायेगा
बादलों के पार अपनी दुनिया बसाएगा
एक दुआ और कुबूल हो जाएगी मेरी

शनिवार, 1 जनवरी 2011

नया साल मुबारक हो

बड़ों पर खीजने से पहले,
उनकी मोहब्बत का लिहाज़ हो.

छोटों को नसीहत से पहले,
उनकी छोटी उम्र का ख्याल हो.

बच्चों पर चिल्लाने से पहले,
अपने बचपन कि नादानी याद हो.

वजह बेवजह उलझने से पहले,
अपने इंसान होने का एहसास हो.

औरों पर ऊँगली उठाने से पहले,
दामन का दाग़ नज़र में हो.

नफरत कि आग में जलने से पहले,
ईमान और मोहब्बत से काम हो.

औकात किसी की आंकने से पहले,
वक़्त के खेल का सबब याद हो.

इन सब के साथ और ख़ुदा से पहले,
हर ग़रीब की हिफाज़त और सम्मान हो.

ख़ुदा से किसी शिकवे से पहले,
कुबूल हुई दुआओं का शुक्रिया अदा हो.

बस इतनी सी गुज़ारिश और दुआ से पहले,
आप सभी को नया साल मुबारक हो.

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

अपना ही अंश

जब चेहरे की खुशी गुम होने लगे
और आँखों में नमी ही रहने लगे
जब होठों पर मुस्कान रुकने से बचे
और खामोशी ढेरों बातें करने लगे
तुम दिल में झाँक कर देख लेना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा

जब किनारे तक पहुंचना मुश्किल लगे
और रस्ते में साँस टूटने लगे
जब दवा भी अपना काम न करे
और दुआओं पर शक होने लगे
तुम ख़ुद को हौसला देना मत भूलना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा

जब वक्त जैसे ठहरा सा लगे
और तारीखों का फ़िर भी हिसाब लगे
जब इंतज़ार हो सुबह की दस्तक का
और शाम के साए लिपटनें लगें
तुम चाँद को सूरज का पता दे देना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा

जब शिकवे शिकायत कहीं जुड़ने लगें
और मीठी यादों से उलझने लगें
जब प्यार और विश्वास की ज़रूरत हो
और मन के मैल उन्हें धोने लगें
तुम अपना हाथ बढ़ाना मत भूलना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा

जब दिल में धुक धुक होने लगे
और टीस का कोई पता न लगे
जब ज़ख्म का जिस्म पर निशान न हो
और दर्द से दामन भरने लगे
तुम उसको बाँहों में भर लेना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा

जब उम्मीद की किरण बुझने लगे
और आस के मोती बिखरने लगें
जब ज़िन्दगी बेईमानी करने लगे
और चुप चाप अलविदा कहने लगे
तुम दो कदम साथ बस दे देना
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा
कोई अपना ही अंश होगा जो दर्द से गुज़र रहा होगा